किराये के घर में शिफ्ट होने से पहले ध्यान रखने योग्य वास्तु टिप्स

By A.K Gupta May 14, 2026 1 min read

किराये के घर में शिफ्ट होने से पहले ध्यान रखने योग्य वास्तु टिप्स

 

किराये का घर लेने से पहले आजकल लोग सिर्फ लोकेशन और किराया ही नहीं देखते, बल्कि घर का माहौल कैसा है इस पर भी ध्यान देने लगे हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि अगर घर में रोशनी और हवा सही हो, कमरे खुले लगें और घर में घुसते ही अच्छा महसूस हो, तो वहां रहना ज्यादा आरामदायक होता है।

किराये के मकान में रहने पर इंसान चाहकर भी सब कुछ अपनी पसंद से नहीं कर पाता। कई बार घर में कुछ बातें ठीक नहीं लगतीं, लेकिन मकान मालिक की वजह से उन्हें बदला भी नहीं जा सकता। ऐसे में धीरे-धीरे मन हटने लगता है और लोग दूसरा घर देखने लगते हैं।

नया घर लेने से पहले यह देख लेना अच्छा रहता है कि घर साफ-सुथरा हो, ज्यादा अंधेरा या सीलन न हो और कमरों में घुटन महसूस न हो। घर का मुख्य दरवाजा और आसपास का माहौल भी काफी मायने रखता है।

कोई भी घर पूरी तरह मन मुताबिक नहीं मिलता, लेकिन थोड़ी-सी समझदारी और साफ-सफाई से रहने की जगह काफी अच्छी लगने लगती है। कमरे ज्यादा भरे हुए न रखें, हल्के और सादे रंगों का इस्तेमाल करें, घर में छोटे पौधे रखें और जो सामान काम का नहीं है उसे हटाते रहें। ऐसी छोटी आदतों से घर का माहौल हल्का, साफ और सुकूनभरा महसूस होता है।

घर किराये पर लेने से पहले किन बातों पर ध्यान दें?

  •  घर में पर्याप्त रोशनी और हवा का आना जरूरी माना जाता है।
  •  उत्तर और पूर्व दिशा बहुत ज्यादा बंद या भारी न हो।
  •  मुख्य प्रवेश द्वार साफ और व्यवस्थित होना चाहिए।
  •  घर में लगातार सीलन, रिसाव या टूट-फूट न हो।
  •  कमरों का वातावरण खुला और आरामदायक महसूस होना चाहिए।
  •  रसोई और बाथरूम की स्थिति भी संतुलित और साफ-सुथरी होनी चाहिए।

यदि किसी घर में छोटे-मोटे वास्तु असंतुलन हों, तो उन्हें सजावट, पौधों, सही दिशा में फर्नीचर रखने और साफ-सफाई जैसे आसान उपायों से काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है।

शांत और सकारात्मक वातावरण वाला घर परिवार के लिए अधिक आरामदायक और सुखद अनुभव देने में मदद कर सकता है।

 

किराए के फ्लैट में वास्तु को क्यों महत्व दिया जाता है?

  • मानसिक और शारीरिक असर:
    घर में हवा, रोशनी और कमरों की बनावट का असर इंसान के मूड, नींद और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है। कई लोग मानते हैं कि बंद और भारी माहौल वाला घर तनाव बढ़ा सकता है।
  • घर का माहौल और रिश्ते:
    कहा जाता है कि घर का वातावरण परिवार के बीच तालमेल और शांति बनाए रखने में भी भूमिका निभाता है।
  • किरायेदार पर ज्यादा असर महसूस होता है:
    जो इंसान उस घर में रोज रहता है, वही वहां का माहौल सबसे ज्यादा महसूस करता है। इसलिए किराये के घर में भी लोग आराम और संतुलन को महत्व देते हैं।
  • शांति और सुकून के लिए:
    अच्छा और खुला माहौल वाला घर लोगों को ज्यादा आरामदायक लगता है। कई बार इसी वजह से लोग घर बदलने का फैसला भी करते हैं।
  • छोटे बदलाव भी काम आते हैं:
    किरायेदार बड़े बदलाव नहीं कर सकते, लेकिन पौधे लगाना, घर साफ रखना और फर्नीचर सही जगह रखना जैसी छोटी बातें घर को बेहतर महसूस करा सकती हैं।

किराये के घरों में वास्तु का महत्व

आजकल बड़ी संख्या में लोग किराये के फ्लैट, अपार्टमेंट और शेयरिंग घरों में रहते हैं। ऐसे घरों में रहने की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि किरायेदार अपनी पसंद के अनुसार बड़े बदलाव नहीं कर सकते। फिर भी कई लोग मानते हैं कि घर का वातावरण, दिशा और ऊर्जा वहां रहने वाले लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकती है।

किराये के घर में आसान वास्तु उपाय

किरायेदार बड़े बदलाव नहीं कर सकते, लेकिन कुछ छोटे उपाय अपनाकर घर का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है। जैसे घर को साफ रखना, सही दिशा में फर्नीचर लगाना, प्राकृतिक रोशनी आने देना और हल्के सजावटी तत्वों का उपयोग करना। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रह सकता है।

वास्तु के अनुसार कौन-सी मंजिल रहने के लिए बेहतर मानी जाती है?

आजकल ऊंची इमारतों और अपार्टमेंट्स में रहने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार फ्लैट की दिशा के साथ-साथ उसकी मंजिल भी घर के वातावरण और ऊर्जा पर प्रभाव डाल सकती है। इसलिए सही फ्लोर का चुनाव करना कई लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
सामान्य रूप से पहली से तीसरी मंजिल तक के फ्लैट अधिक स्थिर और जमीन से जुड़े हुए माने जाते हैं। यह मंजिलें परिवारों, बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए आरामदायक मानी जाती हैं क्योंकि इनमें संतुलित वातावरण महसूस होता है।
ऊपरी मंजिलों पर खुली हवा और अच्छी धूप अधिक मिलती है, जो सकारात्मक मानी जाती है। हालांकि यदि फ्लैट की दिशा सही न हो, तो वहां ऊर्जा का असंतुलन अधिक महसूस हो सकता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार चौथी से छठी मंजिल के बीच स्थित पूर्वमुखी या उत्तरमुखी फ्लैट संतुलित ऊर्जा और आरामदायक जीवन के लिए अच्छे माने जाते हैं। इन मंजिलों पर रोशनी, हवा और शांत वातावरण का बेहतर संतुलन देखने को मिलता है।
यदि किसी फ्लैट के ठीक ऊपर भारी ओवरहेड पानी की टंकी बनी हो, तो ऐसी ऊपरी मंजिलों से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव, बेचैनी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

क्या घर का वास्तु आपकी मानसिक स्थिति पर असर डाल सकता है?

कई लोग मानते हैं कि जिस घर में हम रहते हैं, वहां का माहौल हमारे मन और व्यवहार पर सीधा प्रभाव डालता है।
वास्तु शास्त्र में भी घर की दिशा, रोशनी, खुलापन और वस्तुओं की स्थिति को मानसिक संतुलन से जोड़ा जाता है।
यदि घर का वातावरण असंतुलित हो, तो व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के भी तनाव, चिड़चिड़ापन या बेचैनी महसूस हो सकती है।

ऐसे घरों में रहने वाले लोगों को अक्सर नींद ठीक से न आना, छोटी-छोटी बातों पर बहस होना, मन का अशांत रहना या काम में ध्यान न लगना जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
धीरे-धीरे यह स्थिति मानसिक थकान और नकारात्मक सोच का कारण बन सकती है।

वास्तु के अनुसार सोने की गलत दिशा, बंद उत्तर-पूर्व हिस्सा या घर में पर्याप्त रोशनी और हवा का न होना मानसिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है।
वहीं टूटे हुए कोने, भारी बीम या बहुत अधिक अंधेरा भी घर के वातावरण को भारी बना सकता है।

किराये के मकान में रहने वाले लोगों के लिए बड़े बदलाव करना आसान नहीं होता, इसलिए छोटे-छोटे उपाय अधिक उपयोगी माने जाते हैं।
जैसे कमरे को साफ और खुला रखना, सोने की दिशा बदलना या सकारात्मक प्रतीकों का उपयोग करना।

नमक मिले पानी का कटोरा रखना, हल्की सुगंध का प्रयोग करना या पूजा स्थान को व्यवस्थित रखना घर में शांत वातावरण बनाने में मदद कर सकता है।
इन आसान उपायों से घर का माहौल पहले से अधिक सकारात्मक और सुकूनभरा महसूस हो सकता है।

क्या हो अगर आप शेयर फ्लैट में केवल एक ही कमरा किराए पर लें? पीजी और को-लिविंग सेटअप्स के लिए कुछ वास्तु टिप्स

बड़े शहरों में कई लोग पीजी, हॉस्टल या शेयर फ्लैट में रहते हैं, जहां उनके पास केवल एक कमरा ही होता है। ऐसे में पूरे घर का वास्तु नियंत्रित करना संभव नहीं होता, लेकिन अपने निजी कमरे में कुछ छोटे बदलाव करके बेहतर और सकारात्मक वातावरण बनाया जा सकता है।
    • सोने की सही दिशा चुनें:
      कोशिश करें कि सोते समय आपका सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रहे।
      माना जाता है कि इससे मन शांत रहता है और नींद बेहतर आती है।
    • स्टडी या वर्क टेबल सही जगह रखें:
      पढ़ाई या काम करने की मेज को उत्तर या पूर्व दिशा में रखना अच्छा माना जाता है।
      इससे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
    • कमरे में सकारात्मक चीजों का उपयोग करें: आप कमरे में विंड चाइम, छोटा पूजा प्रतीक या समुद्री नमक से भरी कटोरी रख सकते हैं। कई लोग इन्हें सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए उपयोग करते हैं।
    • कमरे को साफ और व्यवस्थित रखें:
      बहुत ज्यादा सामान, गंदगी या अंधेरा कमरे के वातावरण को भारी बना सकता है।
      इसलिए कमरे में साफ-सफाई और पर्याप्त रोशनी बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
    • हल्के और शांत रंगों का इस्तेमाल करें:  बेडशीट, पर्दे या सजावट में हल्का हरा, हल्का पीला या क्रीम जैसे रंग कमरे को शांत और आरामदायक महसूस करा सकते हैं।

नाम के अनुसार कौन-सी दिशा वाला घर शुभ माना जाता है?

वास्तु शास्त्र में कई लोग घर की दिशा का चुनाव व्यक्ति के नाम या जन्म से जुड़े अक्षरों के आधार पर भी करते हैं। माना जाता है कि सही दिशा वाला घर जीवन में सकारात्मकता, शांति और बेहतर वातावरण देने में मदद कर सकता है। इसी कारण कुछ लोग नया घर खरीदते समय या किराये का घर लेते समय नाम के शुरुआती अक्षर के अनुसार दिशा को महत्व देते हैं।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग अक्षरों को अलग दिशाओं से जोड़ा जाता है। नीचे दी गई सूची केवल सामान्य वास्तु मान्यताओं पर आधारित है —
नाम का प्रारंभिक अक्षर उपयुक्त दिशा
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ पूर्व दिशा
क, ख, ग, घ दक्षिण-पूर्व दिशा
च, छ, ज, झ दक्षिण दिशा
ट, ठ, ड, ढ दक्षिण-पश्चिम दिशा
त, थ, द, ध पश्चिम दिशा
प, फ, ब, भ उत्तर-पश्चिम दिशा
य, र, ल, व उत्तर दिशा
श, ष, स, ह उत्तर-पूर्व दिशा

किराये के घर में मुख्य द्वार और वास्तु से जुड़े जरूरी सुझाव

वास्तु मान्यताओं में घर के मुख्य प्रवेश द्वार को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कई लोगों का मानना है कि घर की सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश मुख्य गेट से ही होता है। इसी कारण किराये का घर लेते समय मेन गेट की दिशा पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है।

 

सामान्य तौर पर उत्तर-पूर्व और पूर्व दिशा में स्थित मुख्य द्वार को शुभ माना जाता है। माना जाता है कि ऐसी दिशा वाले घरों में रोशनी, शांति और सकारात्मक वातावरण बेहतर बना रहता है। वहीं दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित मेन गेट वाले घरों को कई लोग कम अनुकूल मानते हैं।

 

यदि आप लंबे समय तक किसी किराये के घर में रहने की योजना बना रहे हैं, तो यह भी ध्यान रखें कि घर का पूर्व भाग बहुत अधिक ऊंचा या बंद न हो। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इससे घर के वातावरण पर असर पड़ सकता है।

गलत दिशा में बने अटैच बाथरूम के लिए आसान उपाय

किराये के घरों में बाथरूम की दिशा बदलना संभव नहीं होता,
इसलिए छोटे और आसान उपाय अपनाए जाते हैं।
यदि बाथरूम उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो,
तो कई लोग इसे संतुलित करने के लिए कुछ सामान्य वास्तु उपाय अपनाते हैं।

  • बाथरूम का दरवाजा उपयोग के बाद बंद रखें।
  • एक कोने में समुद्री नमक से भरा कटोरा रखें और समय-समय पर बदलते रहें।
  • बाथरूम के पास छोटा इनडोर पौधा जैसे बांस या एरेका पाम रखा जा सकता है।
  • हल्के रंग के शावर कर्टन और साफ-सफाई बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

ऐसे वास्तु संकेत जिन पर घर बदलने का विचार किया जा सकता है

  • यदि उत्तर या पूर्व दिशा पूरी तरह बंद और भारी महसूस हो।
  • घर का उत्तर-पूर्व हिस्सा टूटा हुआ या अव्यवस्थित हो।
  • पश्चिम दिशा बहुत ज्यादा खुली हो या वहां गड्ढा, टैंक या रिसाव हो।
  • दक्षिण-पश्चिम भाग कमजोर या क्षतिग्रस्त दिखाई दे।

किराये के घर के लिए आसान और उपयोगी वास्तु टिप्स

  • घर में नियमित रूप से नमक मिले पानी से पोछा लगाएं।
  • कमरों को साफ, खुला और सुगंधित बनाए रखें।
  • अगरबत्ती, धूप या हल्की खुशबू वाले तेल का उपयोग करें।
  • घर में छोटे पौधे और ताजे फूल रखने की आदत बनाएं।
  • सकारात्मक और शांत चित्रों का उपयोग करें।
  • घर में टूटी या बंद घड़ियां न रखें।
  • नल या पाइप से पानी का रिसाव न होने दें।
  • बाथरूम का दरवाजा इस्तेमाल न होने पर बंद रखें।
  • रसोईघर में दवाइयां रखने से बचें।
  • मुख्य दरवाजे के सामने जूते-चप्पल इकट्ठा न रखें।
  • डाइनिंग टेबल को पूरी तरह खाली न छोड़ें, वहां फल या पानी रखना शुभ माना जाता है।

किराये के घर के लिए आसान और उपयोगी वास्तु टिप्स

आमतौर पर कहा जाता है कि मास्टर बेडरूम घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में हो तो बेहतर रहता है। वहीं ड्रॉइंग रूम या बैठने की जगह उत्तर या पूर्व दिशा में हो तो घर खुला और आरामदायक महसूस होता है।
रसोई में खाना बनाते समय चेहरा पूर्व दिशा की तरफ रहे, इसे भी अच्छा माना जाता है। साथ ही भारी फर्नीचर घर के दक्षिण या पश्चिम हिस्से में रखने से घर ज्यादा संतुलित और व्यवस्थित लगता है।
  • घर में नियमित रूप से नमक मिले पानी से पोछा लगाएं।
  • कमरों को साफ, खुला और सुगंधित बनाए रखें।
  • अगरबत्ती, धूप या हल्की खुशबू वाले तेल का उपयोग करें।
  • घर में छोटे पौधे और ताजे फूल रखने की आदत बनाएं।
  • सकारात्मक और शांत चित्रों का उपयोग करें।
  • घर में टूटी या बंद घड़ियां न रखें।
  • नल या पाइप से पानी का रिसाव न होने दें।
  • बाथरूम का दरवाजा इस्तेमाल न होने पर बंद रखें।
  • रसोईघर में दवाइयां रखने से बचें।
  • मुख्य दरवाजे के सामने जूते-चप्पल इकट्ठा न रखें।

किरायेदारों के लिए आसान और कम खर्च वाले वास्तु उपाय

किराये के घर में रहने वाले लोग अक्सर बड़े बदलाव नहीं कर सकते, इसलिए ऐसे उपाय ज्यादा उपयोगी माने जाते हैं जो बिना तोड़फोड़ और कम खर्च में किए जा सकें। कुछ छोटे बदलाव और प्रतीकात्मक उपाय घर के वातावरण को शांत और सकारात्मक बनाने में मदद कर सकते हैं।
  •  घर के कोनों में समुद्री नमक से भरी छोटी कटोरी रखना कई लोग सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए उपयोग करते हैं।
  •  कपूर जलाना या कमरे में कपूर के टुकड़े रखना वातावरण को ताजगी देने में मदद कर सकता है। समय-समय पर कपूर बदलते रहें।
  •  शाम के समय मुख्य दरवाजे के पास दीपक या हल्की सुगंध का उपयोग घर में शांत माहौल बना सकता है।
  •  हल्के रंगों के पर्दे और साफ-सुथरी सजावट घर को अधिक आरामदायक महसूस करा सकते हैं।
  •  पलंग के सामने सीधे दर्पण रखने से बचना बेहतर माना जाता है।
  •  उत्तर या पूर्व दिशा में छोटे पौधे रखना ताजगी और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
  •  मुख्य द्वार पर स्वास्तिक या शुभ-लाभ जैसे पारंपरिक चिन्ह कई लोग शुभता के लिए लगाते हैं।

बिना किसी बदलाव के घर का वातावरण कैसे बेहतर करें?

किराये के घर में दीवारों या संरचना में बदलाव करना आसान नहीं होता,
लेकिन कुछ सामान्य उपायों से घर का माहौल संतुलित बनाया जा सकता है।

  • घर के प्रवेश द्वार को साफ और व्यवस्थित रखें।
  • पूजा स्थान या शांत कोना बनाकर वहां नियमित दीपक या अगरबत्ती जलाएं।
  • भारी फर्नीचर दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना बेहतर माना जाता है।
  • बिस्तर को बीम के नीचे रखने से बचें।
  • घर में सकारात्मक चित्र या धार्मिक प्रतीक लगाए जा सकते हैं।

वास्तु का प्रभाव किस पर अधिक माना जाता है?

वास्तु को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग राय होती है,
लेकिन सामान्य रूप से माना जाता है कि जिस व्यक्ति का घर में नियमित रहना होता है,
वही वहां के वातावरण और ऊर्जा को सबसे ज्यादा महसूस करता है।
इसलिए किरायेदार के लिए भी घर का माहौल महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

किराये के घर से नकारात्मकता कम करने के आसान तरीके

  • घर को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें।
  • टूटी-फूटी या उपयोग न होने वाली वस्तुएं हटाएं।
  • कमरों में पर्याप्त रोशनी और हवा आने दें।
  • सुगंधित धूप, फूल या हल्का संगीत सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर सकता है।

क्या पश्चिममुखी घर अच्छा माना जाता है?

कई लोग उत्तर और पूर्व दिशा वाले घरों को प्राथमिकता देते हैं,
लेकिन सही कमरे और संतुलित व्यवस्था होने पर पश्चिममुखी घर भी आरामदायक और शुभ माना जा सकता है।

  • मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना बेहतर माना जाता है।
  • लिविंग रूम उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जा सकता है।
  • रसोई में खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख रखना शुभ माना जाता है।
  • फर्नीचर को दक्षिण या पश्चिम हिस्से में रखना संतुलन बनाने में मदद कर सकता है।

घर में सकारात्मकता बढ़ाने के लिए आसान उपाय

  • उत्तर-पूर्व दिशा में सोटा पौधा या पानी का पात्र रखा जा सकता है।
  • तुलसी के पास शाम को दीपक जलाना कई लोग शुभ मानते हैं।
  • मार में प्रवेश करते ही सकारात्मक प्रतीक या सुंदर सजावट रखें।
  • मोर पंख, विंह नाडम या छोरे सजावटी तत्य कई लोग सकारात्मक ऊर्जा के लिए उपयोग करते हैं।
  • झाडू और सफाई का सामान खुली जगह पर न रखें

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    1 क्या दक्षिण दिशा गाला मेन गेट ठीक नहीं माना जाता?

    कुछ लोग दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा गाले दरवाजे बचना पसंद करते हैं, लेकिन घर की बाकी बनावट भी काफी मायने रखती है।

    2 किराये के घर में भी गृह प्रवेश करना चाहिए क्या?

    बहुत लोग नया घर लेने के बाद छोटी पूजा या दीपक जलाकर शुरुआत करते हैं ताकि घर में अच्छा गाहौल बना रहे।
    किराये के घर का माहौल किरो सबसे ज्यादा प्रभावित करता है?
    जिसका रहना रहना उस घर में होता है, वहीं वहां का असर सबसे ज्यादा महसूस करता है। दिनभर उसी माहौल में रहने की वजह से घर की शांति, आराम और माहौल का फर्क सीधे उसी की जिंदगी पर दिखाई देता है। इसलिए लोग कहते हैं कि किरायेदार पर इसका असर ज्यादा पड़ता है।

    3 किराये के घर में वास्तु का असर किस पर ज्यादा पड़ता है?

    देखा जाए तो जो इंसान उस घर में रह रहा होता है, वहीं सबसे ज्यादा असर महसूस करता है। क्योंकि उसका पूरा दिन उसी माहोल में गुजरता है। मकान मालिक वहा नहीं रहता, इसलिए लोग मानते हैं कि फर्क किरायेदार पर ज्यादा पड़ता है।

    4 किराये के घर का मुख्य दरवाजा किस दिशा में होना बेहतर माना जाता है?

    पर देखते समय कई लोग सबसे पहले मेन गेट की दिशा पर ध्यान देते हैं। आमतौर पर उगार और पूर्व दिया बाले प्रवेश द्वार ज्यादा पसंद किए जाते हैं, क्योंकि ऐसे घर खुले और रोशनी वाले महसूस होते हैं।

    5 लोग पर के बाहर घोड़े की नाल क्यों लगाते हैं?

    बहुत सी महिलाओं का मानना होता है कि घर के बाहर मोड़े की नाल लगाने से घर में अन्यछा माहौल बना रहता है। पुराने समय से लोग इसे शुभ मानते भाए हैं। इसलिए कई घरों में आज भी इसे दरवाजे पर लगाया जाता है।

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Written by
A.K Gupta

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