दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के वास्तु दोष कैसे ठीक करें टिप्स
दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के वास्तु दोष कैसे ठीक करें टिप्स
कई लोग मानते हैं कि दक्षिण-पश्चिम दिशा वाला घर कभी-कभी तनाव, रुकावट या नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है। अगर आपके मन में भी ऐसा कोई सवाल है, तो इस लेख में आपको इससे जुड़े कुछ सरल और व्यावहारिक वास्तु उपाय मिलेंगे, जिन्हें अपनाकर आप अपने घर का माहौल बेहतर बना सकते हैं।
वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और मुख्य द्वार को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि घर का प्रवेश द्वार ही सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का रास्ता होता है। अगर यह सही दिशा में न हो, तो कई बार इसका असर घर के वातावरण पर पड़ सकता है।
आमतौर पर वास्तु विशेषज्ञ उत्तर, पूर्व, उत्तर-पूर्व या पश्चिम दिशा वाले घरों को अधिक शुभ मानते हैं। लेकिन सच यह भी है कि हर किसी के पास अपनी पसंद की दिशा वाला घर चुनने का विकल्प नहीं होता।
कई बार ऐसा भी होता है कि मजबूरी में लोगों को दक्षिण-पश्चिम मुखी घर लेना पड़ जाता है। वास्तु के हिसाब से इसे थोड़ा संवेदनशील या चुनौतीपूर्ण दिशा माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसे घर में अच्छे बदलाव नहीं किए जा सकते।
असल बात यह है कि थोड़े-बहुत आसान उपाय अपनाकर इस दिशा से जुड़ी परेशानियों को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है और घर का माहौल पहले से ज्यादा शांत और सकारात्मक बनाया जा सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम मुखी घर को इतना खास क्यों माना जाता है और इसमें किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
आइए सबसे पहले यह समझें कि वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मुखी घर को अशुभ क्यों माना जाता है।
दक्षिण पश्चिम मुखी घर के लिए वास्तु उपाय
क्या आप दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले घरों में वास्तु दोष दूर करने वाले उपाय चाहते हैं? अगर हाँ, तो नीचे दिए गए बिंदुओं को ध्यान से पढ़ें।
1. उत्तर-पूर्व में खुली जगह रखें
अगर आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो वास्तु के अनुसार घर के उत्तर-पूर्व हिस्से को खुला और हल्का रखना काफी फायदेमंद माना जाता है। इस हिस्से में ज्यादा खाली जगह होने से घर के अंदर ऊर्जा का संतुलन बेहतर बना रहता है।
ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और भारी या रुकी हुई ऊर्जा धीरे-धीरे कम होने लगती है। आसान शब्दों में कहें तो घर का माहौल हल्का और शांत महसूस होने लगता है।
साथ ही एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले हिस्से में बहुत ज्यादा खाली जगह या खुलापन रखना सही नहीं माना जाता। इसे संतुलित रखना ही बेहतर परिणाम देता है।
2. पानी की टंकी की सही जगह
अगर घर दक्षिण-पश्चिम दिशा में है तो कई लोग सलाह देते हैं कि इस हिस्से में ओवरहेड पानी की टंकी रखी जा सकती है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में थोड़ा बैलेंस बना रहता है और माहौल ज्यादा stable रहता है।
कुछ लोगों का मानना है कि सही जगह पर टंकी होने से घर में बेवजह की दिक्कतें कम हो सकती हैं।
लेकिन एक चीज का ध्यान रखना जरूरी है — दक्षिण-पूर्व कोने में पानी की टंकी कभी नहीं रखनी चाहिए। इसे वास्तु में सही नहीं माना जाता और लोग इसे नुकसानदायक भी मानते हैं।
और हाँ, ओवरहेड और अंडरग्राउंड टंकी दोनों अलग-अलग जगह पर रखी जाती हैं। बस इतना समझ लो कि पानी की टंकी को कहीं भी बिना सोचे-समझे नहीं रखना चाहिए, दिशा का ध्यान रखना जरूरी है।
3. भारी सामान की जगह
घर में जो भारी चीजें होती हैं ना, जैसे वॉशिंग मशीन, बड़ी अलमारी या भारी सोफा, इन्हें ज्यादातर लोग दक्षिण-पश्चिम साइड में रखते हैं।
दक्षिण-पश्चिम वाले घर में भी लोग आमतौर पर यही करते हैं कि भारी सामान उसी तरफ रख देते हैं, ताकि घर में ज्यादा बिखराव या अजीब सा फील न आए।
4. पानी से जुड़े चीजें (फव्वारा / एक्वेरियम / पूल)
कुछ लोग मानते हैं कि दक्षिणमुखी घर में फव्वारा, स्विमिंग पूल या एक्वेरियम जैसी चीजें रखना सही नहीं होता। लेकिन इस पर हर किसी की अलग राय होती है।
कई वास्तु एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर घर दक्षिण-पश्चिम मुखी है, तो पानी से जुड़ी चीजें जैसे फव्वारा या एक्वेरियम को उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जा सकता है। इससे घर का माहौल थोड़ा हल्का और अच्छा महसूस हो सकता है।
लेकिन ये भी जरूरी है कि इसे बहुत ज्यादा न किया जाए और घर में जगह और संतुलन देखकर ही कुछ रखा जाए।
5. शौचालय और बाथरूम
दक्षिण-पश्चिम साइड में टॉयलेट या बाथरूम बनाना लोग सही नहीं मानते।
ऐसा कहा जाता है कि ये हिस्सा घर का थोड़ा मजबूत वाला भाग होता है, इसलिए यहाँ ऐसी चीजें नहीं रखनी चाहिए।
ज्यादातर लोग बस यही करते हैं कि बाथरूम को किसी दूसरी जगह बना लेते हैं ताकि घर में सब कुछ ठीक-ठाक और balanced लगे।
6. दक्षिण पश्चिम मुखी घर रसोई की सही जगह
लोग अक्सर कहते हैं कि दक्षिण-पश्चिम दिशा में रसोई होना ठीक नहीं माना जाता।
ऐसा माना जाता है कि इससे घर का माहौल थोड़ा असंतुलित हो सकता है और कभी-कभी रिश्तों में भी खटास जैसी स्थिति बन जाती है।
अगर किसी घर में रसोई इसी दिशा में बनी है, तो कुछ लोग इसका हल यह बताते हैं कि घर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में दूसरी छोटी रसोई बना ली जाए।
कहा जाता है कि अगर उस रसोई का इस्तेमाल रोज़ किया जाए, खासकर गैस चूल्हा वहीं रखा जाए, तो घर का माहौल थोड़ा बेहतर महसूस हो सकता है।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि हल्के पीले रंग का इस्तेमाल रसोई में अच्छा रहता है।
7. दक्षिण-पश्चिम मुखी घर में पूजा कक्ष
लोग बोलते हैं कि पूजा का कमरा हो तो उत्तर-पूर्व में रखना चाहिए।
अगर वहाँ जगह नहीं है तो उत्तर या पूर्व में भी रख लेते हैं।
बस इतना ही ध्यान रखते हैं कि कहीं भी गलत जगह न बन जाए और माहौल ठीक रहे।
दक्षिण-पश्चिम साइड में पूजा कमरा नहीं रखते लोग आमतौर पर।
8. दक्षिण-पश्चिम घर के मुखी की अतिरिक्त वास्तु उपाय
- अगर घर में थोड़ा बहुत वास्तु का असर कम करना हो, तो लोग कुछ छोटे-छोटे उपाय भी करते हैं।
- कई लोग मुख्य दरवाजे के पास हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति रखते हैं।
- कुछ लोग दरवाजे के पास गायत्री मंत्र या कोई शुभ मंत्र भी लगाते हैं।
- अगर दीवार खाली हो तो वहाँ गणेश जी की फोटो या मूर्ति रख लेते हैं।
- घर में दरवाजे और खिड़कियों की संख्या बराबर रखने की कोशिश की जाती है।
- कुछ लोग घर में हल्के गुलाबी या पीले जैसे शांत रंग इस्तेमाल करते हैं।
- मिट्टी जैसे रंग (भूरा, बेज, टेराकोटा) और लकड़ी या पत्थर जैसी चीजें भी लोग इस्तेमाल करते हैं।
- भारी फर्नीचर जैसे अलमारी, सोफा वगैरह आमतौर पर घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में रखा जाता है।
- कुछ लोग इस कोने में तांबे की चीजें या क्रिस्टल भी रखते हैं ताकि घर का माहौल थोड़ा शांत लगे।
9. दक्षिण-पश्चिम मुखी घर में बालकनी के लिए वास्तु उपाय
हालाँकि वास्तु शास्त्र में आमतौर पर सलाह दी जाती है कि दक्षिण-पश्चिम दिशा में बालकनी बनाने से बचना चाहिए, लेकिन अगर किसी कारण से बालकनी बन ही जाती है, तो कुछ छोटे उपाय अपनाकर इसका असर कम किया जा सकता है।
- बालकनी में स्लाइडिंग खिड़कियाँ लगवाना बेहतर माना जाता है। ध्यान रखें कि ये खिड़कियाँ उत्तर या पूर्व दिशा वाली खिड़कियों से छोटी हों।
- खिड़कियों पर हल्के पीले या सुनहरे रंग के पर्दे लगाने से माहौल थोड़ा बेहतर महसूस हो सकता है।
- कुछ लोग बालकनी में छोटे कंकड़ या क्रिस्टल भी रखते हैं ताकि जगह का बैलेंस बना रहे।
- बालकनी में रंगीन विंड चाइम्स लगाने से भी लोग सकारात्मक माहौल और हल्की शांति महसूस करते हैं।
10. दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के लिए लिविंग रूम वास्तु
दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले घर में लिविंग रूम भी इसी हिस्से में बनाया जा सकता है। कई लोग मानते हैं कि यह जगह उन घरों के लिए अच्छी रहती है जहाँ परिवार या मेहमान अक्सर एक साथ बैठते हैं या छोटे-बड़े कार्यक्रम होते रहते हैं।
दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के लिविंग रूम के लिए कुछ बातें ध्यान में रखी जा सकती हैं:
- कोशिश करें कि लिविंग रूम का मुख्य दरवाजा दक्षिण दिशा में न हो।
- इस दिशा वाले घर में हल्के रंग जैसे सफेद या पीला इस्तेमाल करने से माहौल थोड़ा हल्का और अच्छा महसूस हो सकता है।
- कई लोग लिविंग रूम में दरवाजों या खिड़कियों में कांच का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जगह खुली और सुंदर लगती है।
- पर्दों का इस्तेमाल भी लिविंग रूम को और आरामदायक और आकर्षक बनाने में मदद करता है।
11. दक्षिण-पश्चिम दिशा वाले घर में बाथरूम का स्थान
अगर आपका घर दक्षिण-पश्चिम मुखी है, तो बाथरूम की सही जगह चुनना थोड़ा ध्यान से करना चाहिए।
आमतौर पर घर में बाथरूम पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाना ज्यादा सही माना जाता है। लोग मानते हैं कि इन दोनों जगहों पर संतुलन बना रहता है और घर का माहौल सामान्य रहता है।
कुछ लोग बाथरूम को दक्षिण-पश्चिम में भी बना लेते हैं, लेकिन इसे हर घर के लिए आदर्श नहीं माना जाता। ऐसा माना जाता है कि इस हिस्से में बाथरूम होने से घर का बैलेंस थोड़ा प्रभावित हो सकता है और इसका असर घर के वातावरण पर भी पड़ सकता है। अगर मजबूरी में इसे इसी दिशा में बनाना पड़े, तो लोग कोशिश करते हैं कि इसे दक्षिण-पश्चिम के अंदरूनी हिस्से की तरफ रखा जाए।
इसके अलावा एक बात बहुत लोग मानते हैं कि बाथरूम को हमेशा साफ-सुथरा रखना जरूरी है। साफ-सफाई से घर का माहौल हल्का और बेहतर महसूस होता है।
दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के दोषों को कैसे दूर करें
अगर दक्षिण-पश्चिम मुखी घर में कुछ वास्तु से जुड़ी दिक्कतें महसूस हों, तो कुछ लोग नीचे दिए गए उपाय अपनाते हैं:
- कुछ लोग घर के बाहर की दीवार पर वास्तु पिरामिड लगाना सही मानते हैं।
- अगर इस दिशा में शौचालय है, तो उसका दरवाजा ज्यादा देर खुला न छोड़ने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे घर का माहौल थोड़ा संतुलित रहता है।
- बाथरूम में शीशा हो तो उसे आमतौर पर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ लगाया जाता है।
- एग्जॉस्ट फैन लगाने के लिए लोग उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा को बेहतर मानते हैं।
- बाथरूम का दरवाजा ज्यादातर लोग लकड़ी का रखते हैं, धातु का कम इस्तेमाल किया जाता है।
- रंगों की बात करें तो हल्का ग्रे या हल्का नीला जैसे रंग बाथरूम में लोग पसंद करते हैं, ताकि जगह हल्की और साफ महसूस हो।
12. दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के दोषों को कैसे दूर करें
अगर दक्षिण-पश्चिम मुखी घर में कुछ वास्तु से जुड़ी दिक्कतें महसूस हों, तो कुछ आसान उपाय अपनाकर उन्हें थोड़ा संतुलित किया जा सकता है:
- बाहरी दीवार पर वास्तु पिरामिड लगाना लोग एक उपाय के तौर पर अपनाते हैं।
- अगर इस दिशा में शौचालय है, तो उसका दरवाजा ज्यादा देर खुला न रखें, इसे बंद रखने की सलाह दी जाती है।
- बाथरूम में लगा दर्पण आमतौर पर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रखा जाता है।
- एग्जॉस्ट फैन के लिए उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा को ज्यादा सही माना जाता है।
- बाथरूम का दरवाजा ज्यादातर लोग लकड़ी का रखना पसंद करते हैं, धातु से बचा जाता है।
- बाथरूम में हल्के रंग जैसे ग्रे या हल्का नीला लोग ज्यादा इस्तेमाल करते हैं ताकि जगह हल्की और साफ लगे।
दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के लाभ
दक्षिण-पश्चिम मुखी घर से जुड़े कुछ वास्तु लाभ इस तरह बताए जाते हैं:
- माना जाता है कि सही तरीके से बना हुआ दक्षिण-पश्चिम मुखी घर परिवार में स्थिरता और समृद्धि लाने में मदद करता है।
- अगर घर की दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिशा की दीवारें उत्तर और उत्तर-पूर्व की तुलना में थोड़ी ऊँची हों, तो इसे अच्छा संतुलन माना जाता है। ऐसा लोग सकारात्मक परिणामों से जोड़ते हैं।
- जिन घरों में बालकनी उत्तर या उत्तर-पूर्व की तरफ ढलान के साथ होती है, उन्हें भी कई लोग बेहतर मानते हैं। इससे घर का माहौल हल्का और अच्छा महसूस हो सकता है।
- अगर घर को वास्तु के हिसाब से ठीक तरीके से बनाया गया हो, तो उसे लोग ज्यादा सुरक्षित और स्थिर मानते हैं।
दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के लिए निष्कर्ष
हर घर पूरी तरह से वास्तु नियमों के हिसाब से बना हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार घर में कुछ बातें वास्तु से मेल नहीं खातीं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वो घर खराब या अशुभ होता है।
दक्षिण-पश्चिम मुखी घर के मामले में भी कुछ आसान और सामान्य उपाय अपनाकर माहौल को बेहतर बनाया जा सकता है। धीरे-धीरे छोटे बदलाव करके घर का संतुलन ठीक किया जा सकता है और रहने का अनुभव भी अच्छा महसूस होता है।
असल बात यह है कि घर में शांति और आराम का माहौल बना रहे। सही सोच और छोटे-छोटे सुधारों से घर को ज्यादा सकारात्मक बनाया जा सकता है।
Q: अगर कोई दक्षिण-पश्चिम मुखी घर में रहता है तो क्या होता है?
A: लोग मानते हैं कि ऐसे घर में कभी-कभी छोटी-मोटी परेशानियाँ या घर के माहौल में भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए कई लोग कुछ आसान वास्तु उपाय कर लेते हैं ताकि घर का माहौल ठीक बना रहे।
Q: क्या दक्षिण-पश्चिम मुखी घर अच्छा माना जाता है?
A: वैसे तो लोग इस दिशा वाले घर को थोड़ा मुश्किल मानते हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसमें रहा ही न जा सके। अगर घर सही तरीके से रखा जाए और कुछ छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो सब सामान्य रहता है।
Q: दक्षिण-पश्चिम दिशा में क्या रखना सही माना जाता है?
A: इस साइड लोग भारी चीजें रखते हैं। जैसे बड़ी अलमारी, सोफा या ऐसा सामान जो ज्यादा इधर-उधर नहीं होता।
Q: दक्षिण-पश्चिम मुखी घर में आसान उपाय क्या हो सकता है?
A: कई लोग दरवाजे के आसपास ओम या स्वास्तिक जैसा निशान लगा देते हैं। बस मन की शांति के लिए और घर अच्छा लगे इसलिए।
Q: लिविंग रूम के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में क्या रखना चाहिए?
A: कुछ लोग यहाँ छोटे पौधे या सजावट की चीजें रख देते हैं। बस कमरा खाली-खाली या अजीब सा न लगे इसलिए।
